श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक d47
 
 
श्लोक  1.206.d47 
श्रीवासुदेव उवाच
युक्तमेतन्महाराज कौरवाणां यशस्करम्।
शीघ्रमद्यैव राजेन्द्र यथोक्तं कर्तुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
(तब) भगवान श्रीकृष्ण ने कहा - महाराज! आपका यह विचार सर्वथा उत्तम है और कौरवों का यश बढ़ाने वाला है। राजन! आपने जो कुछ कहा है, उसे आज ही यथाशीघ्र पूरा कीजिए।
 
(Then) Lord Krishna said - Maharaj! This idea of yours is absolutely good and will increase the glory of the Kauravas. King! Whatever you have said, complete it today itself as soon as possible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)