श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  1.206.41-42 
आम्रैराम्रातकैर्नीपैरशोकैश्चम्पकैस्तथा।
पुन्नागैर्नागपुष्पैश्च लकुचै: पनसैस्तथा॥ ४१॥
शालतालतमालैश्च बकुलैश्च सकेतकै:।
मनोहरै: सुपुष्पैश्च फलभारावनामितै:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो आम, अमड़, कदम्ब, अशोक, चम्पा, पुन्नाग, नागपुष्प, लकुच, कटहल, साल, ताल, तमाल, मौलसिरी और केवड़ा आदि सुन्दर वृक्षों से सुशोभित थे, जो सुन्दर फूलों से लदे हुए थे और फलों के भार से झुके हुए थे ॥41-42॥
 
Which were adorned with beautiful trees like mango, amda, kadamba, ashoka, champa, punnaga, nagpushpa, lakucha, jackfruit, sal, taal, tamal, maulsiri and kevada etc. filled with beautiful flowers and bent under the weight of fruits. ॥41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)