श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  1.206.26-27 
वैशम्पायन उवाच
प्रतिगृह्य तु तद् वाक्यं नृपं सर्वे प्रणम्य च॥ २६॥
प्रतस्थिरे ततो घोरं वनं तन्मनुजर्षभा:।
अर्धं राज्यस्य सम्प्राप्य खाण्डवप्रस्थमाविशन्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! पाण्डवों ने राजा धृतराष्ट्र की बात मानकर उन्हें प्रणाम किया। आधा राज्य पाकर वे खाण्डवप्रस्थ की ओर चल पड़े, जो एक भयानक वन के रूप में था। धीरे-धीरे वे खाण्डवप्रस्थ पहुँच गए। 26-27।
 
Vaishampayana says- Janamejaya! The Pandavas accepted the words of King Dhritarashtra and bowed down to him. After getting half the kingdom, they proceeded towards Khandavprastha, which was in the form of a dreadful forest. Slowly they reached Khandavprastha. 26-27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)