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mahabharat 1.205.6: हे महात्मन! सौभाग्य से हम सब लोग उन्नति कर रहे हैं। सौभाग्य से ही पापी पुरोचन शांत हो गया है और सौभाग्य से ही मेरा महान दुःख समाप्त हो गया है।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.205.6 
दिष्टॺा वर्धामहे सर्वे दिष्टॺा शान्त: पुरोचन:।
दिष्टॺा मम परं दु:खमपनीतं महाद्युते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! सौभाग्य से हम सब लोग उन्नति कर रहे हैं। सौभाग्य से ही पापी पुरोचन शांत हो गया है और सौभाग्य से ही मेरा महान दुःख समाप्त हो गया है।॥6॥
 
O great one! By good fortune all of us are prospering. It is by good fortune that the sinful Purochana has been pacified and by good fortune my great sorrow has ended. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)