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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.205.20 
धृतराष्ट्रश्च पाञ्चाल्य त्वया सम्बन्धमीयिवान्।
कृतार्थं मन्यतेऽऽत्मानं तथा सर्वेऽपि कौरवा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पांचाल नरेश! राजा धृतराष्ट्र आपके सम्बन्धी होने पर स्वयं को धन्य मानते हैं। यही स्थिति समस्त कौरवों की है।
 
King of Panchala! King Dhritarashtra considers himself blessed to be your relative. This is the condition of all the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)