Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.205.19: आपके प्रिय मित्र परम बुद्धिमान भरद्वाजनंदन द्रोणाचार्य भी आपको (ध्यानपूर्वक) गले लगाकर आपका कुशल-क्षेम पूछ रहे हैं॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 1.205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.205.19 
भारद्वाजो महाप्राज्ञो द्रोण: प्रियसखस्तव।
समाश्लेषमुपेत्य त्वां कुशलं परिपृच्छति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आपके प्रिय मित्र परम बुद्धिमान भरद्वाजनंदन द्रोणाचार्य भी आपको (ध्यानपूर्वक) गले लगाकर आपका कुशल-क्षेम पूछ रहे हैं॥ 19॥
 
Your dear friend, the highly intelligent Bharadvajanandan Dronacharya is also (mindfully) embracing you and asking about your well-being.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)