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mahabharat 1.205.18: इसी प्रकार शान्तनुपुत्र महाज्ञानी भीष्मजी भी समस्त कौरवों के साथ मिलकर सब प्रकार से आपका कुशल-क्षेम पूछते हैं॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.205.18 
तथा भीष्म: शांतनव: कौरवै: सह सर्वश:।
कुशलं त्वां महाप्राज्ञ: सर्वत: परिपृच्छति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार शान्तनुपुत्र महाज्ञानी भीष्मजी भी समस्त कौरवों के साथ मिलकर सब प्रकार से आपका कुशल-क्षेम पूछते हैं॥18॥
 
Similarly, Shantanu's son, the great and wise Bhishmaji, along with all the Kauravas, enquires about your well-being in every possible way. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)