Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.205.10: राजा द्रुपद ने भी धर्मानुसार विदुरजी का सत्कार किया। फिर वे दोनों विधिपूर्वक एक-दूसरे का कुशल-समाचार पूछने और कहने लगे॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 1.205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 205: धृतराष्ट्रकी आज्ञासे विदुरका द्रुपदके यहाँ जाना और पाण्डवोंको हस्तिनापुर भेजनेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.205.10 
स चापि प्रतिजग्राह धर्मेण विदुरं तत:।
चक्रतुश्च यथान्यायं कुशलप्रश्नसंविदम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा द्रुपद ने भी धर्मानुसार विदुरजी का सत्कार किया। फिर वे दोनों विधिपूर्वक एक-दूसरे का कुशल-समाचार पूछने और कहने लगे॥ 10॥
 
King Drupada also honoured Vidurji according to the Dharma. Then both of them started asking and sharing news about each other's well-being in the proper manner.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)