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mahabharat 1.204.5: राजन! वे दोनों ही आयु, बुद्धि और शास्त्र-ज्ञान - सभी दृष्टियों से उन्नत हैं और वे आपके तथा पाण्डवों के प्रति समान आदर रखते हैं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 204: विदुरजीकी सम्मति—द्रोण और भीष्मके वचनोंका ही समर्थन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.204.5 
इमौ हि वृद्धौ वयसा प्रज्ञया च श्रुतेन च।
समौ च त्वयि राजेन्द्र तथा पाण्डुसुतेषु च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजन! वे दोनों ही आयु, बुद्धि और शास्त्र-ज्ञान - सभी दृष्टियों से उन्नत हैं और वे आपके तथा पाण्डवों के प्रति समान आदर रखते हैं॥5॥
 
King! Both of them are advanced in all aspects - age, intelligence and knowledge of scriptures - and they have equal regard for you and the Pandavas. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)