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श्लोक 1.202.19  |
यदि धर्मस्त्वया कार्यो यदि कार्यं प्रियं च मे।
क्षेमं च यदि कर्तव्यं तेषामर्धं प्रदीयताम्॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| यदि तुम धर्म के मार्ग पर चलना चाहते हो, मुझे प्रसन्न करना चाहते हो और (संसार में) कल्याण करना चाहते हो, तो अपना आधा राज्य उन्हें दे दो॥19॥ |
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| If you want to follow the path of Dharma, if you want to please me and if you want to do good (in the world), then give half your kingdom to them.॥ 19॥ |
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इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि विदुरागमनराज्यलम्भपर्वणि भीष्मवाक्ये द्वॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत विदुरागमन-राज्यलम्भपर्वमें भीष्मवाक्यविषयक दो सौ दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २०२॥
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