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mahabharat 1.201.7: उनमें फूट डालकर कृष्ण को उनसे अलग करना असम्भव है, क्योंकि जब पाण्डव भिक्षावृत्ति के कारण दुःखी थे, तब कृष्ण ने उन्हें चुना था; अब जब वे धनवान हो गए हैं और स्वच्छ तथा सुन्दर वस्त्र धारण करते हैं, तब अब वह उनसे उदासीन क्यों रहेगी?॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.201: पाण्डवोंको पराक्रमसे दबानेके लिये कर्णकी सम्मति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 201: पाण्डवोंको पराक्रमसे दबानेके लिये कर्णकी सम्मति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.201.7 
न चापि कृष्णा शक्येत तेभ्यो भेदयितुं परै:।
परिद्यूनान् वृतवती किमुताद्य मृजावत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उनमें फूट डालकर कृष्ण को उनसे अलग करना असम्भव है, क्योंकि जब पाण्डव भिक्षावृत्ति के कारण दुःखी थे, तब कृष्ण ने उन्हें चुना था; अब जब वे धनवान हो गए हैं और स्वच्छ तथा सुन्दर वस्त्र धारण करते हैं, तब अब वह उनसे उदासीन क्यों रहेगी?॥ 7॥
 
It is impossible to separate Krishna from them by creating a rift, because Krishna had chosen them when the Pandavas were miserable due to being alms-eaters; now that they have become wealthy and wear clean and beautiful clothes, why would she be indifferent to them now?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)