श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 20: कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.20.3 
विनतोवाच
श्वेत एवाश्वराजोऽयं किं वा त्वं मन्यसे शुभे।
ब्रूहि वर्णं त्वमप्यस्य ततोऽत्र विपणावहे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
विनता बोली - शुभे! यह घोड़ा तो सफ़ेद रंग का है। तुम्हें कैसा लगा? तुम मुझे भी इसका रंग बताओ, फिर हम दोनों इस पर दांव लगाएँगे।
 
Vinata said - Shubhe! This horse is of white colour. How do you think of it? You also tell me its colour, then both of us will bet for it.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd