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mahabharat 1.2.77: फिर शुकप्रश्नभिगमन, ब्रह्मप्रश्नुशासन, दुर्वासाका प्रादुर्भाव और माया संवाद पर्व हैं। 77॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.2.77 
शुकप्रश्नाभिगमनं ब्रह्मप्रश्नानुशासनम्।
प्रादुर्भावश्च दुर्वास: संवादश्चैव मायया॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
फिर शुकप्रश्नभिगमन, ब्रह्मप्रश्नुशासन, दुर्वासाका प्रादुर्भाव और माया संवाद पर्व हैं। 77॥
 
Then there are Shukaprashnabhighamana, Brahmaprasnanushasana, Durvasaka Pradurbhava and Maya Samvad Parva. 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)