श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.2.67 
जम्बूखण्डविनिर्माणं पर्वोक्तं तदनन्तरम्।
भूमिपर्व तत: प्रोक्तं द्वीपविस्तारकीर्तनम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद जम्बूखण्ड निर्माणपर्व है। उसके बाद भूमिपर्व है, जिसमें द्वीपों के विस्तार की प्रशंसा की गई है।
 
After this there is the Jambukhanda Nirmanaparva. After that there is the Bhumiparva, in which the expansion of the islands is praised. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)