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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.2.48 
पर्व दिग्विजयादूर्ध्वं राजसूयिकमुच्यते।
ततश्चार्घाभिहरणं शिशुपालवधस्तत:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद राजसूय, अर्घबिहारण और शिशुपाल-वधपर्व कहा जाता है। 48॥
 
Thereafter, Rajasuya, Arghabiharan and Shishupala-Vadhparva are said. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)