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mahabharat 1.2.43: इसके बाद जतुगृह (लाक्षा भवन) दाहपर्व है। उसके बाद हिडिम्बवध पर्व, फिर बकवध और उसके बाद चैत्ररथ पर्व है ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.2.43 
दाहो जतुगृहस्यात्र हैडिम्बं पर्व चोच्यते।
ततो बकवध: पर्व पर्व चैत्ररथं तत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद जतुगृह (लाक्षा भवन) दाहपर्व है। उसके बाद हिडिम्बवध पर्व, फिर बकवध और उसके बाद चैत्ररथ पर्व है ॥43॥
 
After this, Jatugriha (Laksha Bhavan) is the Dahparva. After that there is Hidimbavadha Parva, then Bakvadha and after that there is Chaitrarath Parva. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)