श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 386
 
 
श्लोक  1.2.386 
अस्याख्यानस्य विषये पुराणं वर्तते द्विजा:।
अन्तरिक्षस्य विषये प्रजा इव चतुर्विधा:॥ ३८६॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! इस महाभारत इतिहास में अठारह पुराण हैं, जैसे आकाश में चारों प्रकार के प्राणी (जीवज्र, स्वेदज्र, अण्डज्रज्र और वनस्पतिज्र) विद्यमान हैं।
 
O twice-born! Within this Mahabharata history there are eighteen Puranas, just as within the sky all four kinds of creatures (viviparous, sweat-born, oviparous and plant-born) exist.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)