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mahabharat 1.2.379-380: खिलपर्वों में हरिवंश और भविष्य का वर्णन किया गया है। महर्षि व्यास ने हरिवंश के खिलपर्वों में बारह हज़ार (12,000) श्लोकों की गणना करके उन्हें रखा है। इस प्रकार इन सभी पर्वों का संग्रह महाभारत में वर्णित है। 379-380।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.379-380 
खिलेषु हरिवंशश्च भविष्यं च प्रकीर्तितम्।
दशश्लोकसहस्राणि विंशच्छ्लोकशतानि च॥ ३७९॥
खिलेषु हरिवंशे च संख्यातानि महर्षिणा।
एतत् सर्वं समाख्यातं भारते पर्वसंग्रह:॥ ३८०॥
 
 
अनुवाद
खिलपर्वों में हरिवंश और भविष्य का वर्णन किया गया है। महर्षि व्यास ने हरिवंश के खिलपर्वों में बारह हज़ार (12,000) श्लोकों की गणना करके उन्हें रखा है। इस प्रकार इन सभी पर्वों का संग्रह महाभारत में वर्णित है। 379-380।
 
Harivansh and future have been described in the Khilparvas. Maharishi Vyas has calculated and kept twelve thousand (12,000) verses in the Khilparvas of Harivansh. In this way, a collection of all these parvas has been described in the Mahabharata. 379-380.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)