मैवमित्यब्रवीत् कृष्ण: शमयंस्तस्य तद् वच:।
यत्रास्त्रमस्त्रेण च तच्छमयामास फाल्गुन:॥ ३०७॥
अनुवाद
परंतु भगवान् श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के क्रोधपूर्ण वचनों को - ‘मैवम्’ - ‘पाण्डवों का विनाश न हो’ कहकर शांत कर दिया। उसी समय अर्जुन ने अपने दिव्यास्त्र से उसके अस्त्र को शांत कर दिया ॥307॥
But Lord Shri Krishna pacified Ashwatthama's angry words by saying - 'Maivam' - 'May the Pandavas not be destroyed.' At the same time, Arjun silenced his weapon with his divine weapon. 307॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥