श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 287-288
 
 
श्लोक  1.2.287-288 
दुर्योधनस्य राज्ञोऽथ यत्र भीमेन संयुगे॥ २८७॥
ऊरू भग्नौ प्रसह्याजौ गदया भीमवेगया।
नवमं पर्व निर्दिष्टमेतदद्‍भुतमर्थवत्॥ २८८॥
 
 
अनुवाद
जिसमें युद्ध के समय भीमसेन ने हठपूर्वक (युद्ध के नियमों का उल्लंघन करते हुए) अपनी भयंकर वेगशाली गदा से राजा दुर्योधन की दोनों जाँघें तोड़ डालीं। यह अद्भुत अर्थवाला नौवाँ पर्व है॥287-288॥
 
In which during the war Bhimasena obstinately (violating the rules of war) broke both the thighs of King Duryodhana with his terrifyingly swift mace. This is the ninth festival having wonderful meaning.॥ 287-288॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)