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mahabharat 1.2.284-285: परन्तु राक्षसों ने दुर्योधन के इस प्रयत्न के विषय में भीमसेन को बताया। तब बुद्धिमान धर्मराज के व्यंग्यपूर्ण वचनों से अत्यन्त क्रोध में भरकर धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन सरोवर से बाहर आया और भीमसेन के साथ गदायुद्ध किया। ये सब घटनाएँ शल्यपर्व में ही हैं। 284-285॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 284-285
 
 
श्लोक  1.2.284-285 
प्रवृत्तिस्तत्र चाख्याता यत्र भीमस्य लुब्धकै:।
क्षेपयुक्तैर्वचोभिश्च धर्मराजस्य धीमत:॥ २८४॥
ह्रदात् समुत्थितो यत्र धार्तराष्ट्रोऽत्यमर्षण:।
भीमेन गदया युद्धं यत्रासौ कृतवान् सह॥ २८५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु राक्षसों ने दुर्योधन के इस प्रयत्न के विषय में भीमसेन को बताया। तब बुद्धिमान धर्मराज के व्यंग्यपूर्ण वचनों से अत्यन्त क्रोध में भरकर धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन सरोवर से बाहर आया और भीमसेन के साथ गदायुद्ध किया। ये सब घटनाएँ शल्यपर्व में ही हैं। 284-285॥
 
But the demons told Bhimsen about this attempt of Duryodhana. Then Dhritarashtra's son Duryodhana, filled with great anger by the sarcastic words of the wise Dharmaraja, came out of the lake and fought a mace fight with Bhimasena. All these incidents are in Shalya Parva only. 284-285॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)