Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.261-264: अर्जुन ने युद्धभूमि में शेष बचे संशप्तकों का नाश कर दिया। महान संशप्तक योद्धाओं की संख्या नौ करोड़ थी; किन्तु किरीटधारी अर्जुन ने आक्रमण करके अकेले ही उन सभी को यमलोक पहुँचा दिया। धृतराष्ट्रपुत्र, विशाल शिलाओं से लड़ने वाले म्लेच्छ सैनिक, युद्धभूमि में अपनी अद्वितीय कला और कौशल दिखाने वाले नारायण नामक ग्वाले, अलम्बुष, श्रुतायु, महाबली जलसंध, भूरिश्रवा, विराट, महारथी द्रुपद और घटोत्कच जैसे महारथियों के वध की कथा भी इस पर्व में वर्णित है। | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन ने युद्धभूमि में शेष बचे संशप्तकों का नाश कर दिया। महान संशप्तक योद्धाओं की संख्या नौ करोड़ थी; किन्तु किरीटधारी अर्जुन ने आक्रमण करके अकेले ही उन सभी को यमलोक पहुँचा दिया। धृतराष्ट्रपुत्र, विशाल शिलाओं से लड़ने वाले म्लेच्छ सैनिक, युद्धभूमि में अपनी अद्वितीय कला और कौशल दिखाने वाले नारायण नामक ग्वाले, अलम्बुष, श्रुतायु, महाबली जलसंध, भूरिश्रवा, विराट, महारथी द्रुपद और घटोत्कच जैसे महारथियों के वध की कथा भी इस पर्व में वर्णित है।
Arjuna destroyed the remaining Sanshaptakas on the battlefield. The number of the great Sanshaptaka warriors was nine crores; but Arjuna, who wore the crown, attacked and single-handedly sent them all to Yamaloka. The story of the killing of great warriors like Dhritarashtra's son, the mlechha soldiers who fought with huge rocks, the cowherd named Narayan who showed his unique art and skill in the battlefield, Alambusha, Shrutayu, the mighty Jalasandh, Bhurishrava, Virat, the great warrior Drupada and Ghatotkacha, is also mentioned in this festival.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥