श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 238
 
 
श्लोक  1.2.238 
ते तस्य वचनं श्रुत्वा मन्त्रयित्वा च यद्धितम्।
सांग्रामिकं तत: सर्वं सज्जं चक्रु: परंतपा:॥ २३८॥
 
 
अनुवाद
उनकी बातें सुनकर शत्रुसंहारक पाण्डवों ने विचार किया कि आगे क्या करना उनके हित में होगा और वे युद्ध के लिए आवश्यक समस्त सामग्री जुटाने लगे।
 
After listening to his words, the enemy-slayer Pandavas deliberated upon what further action would be in their best interest and began to gather all the material required for war. 238.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)