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mahabharat 1.2.232: यद्यपि भगवान कृष्ण दोनों पक्षों का कल्याण चाहते थे और शांति की प्रार्थना कर रहे थे, फिर भी राजा दुर्योधन ने उनका विरोध किया।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 232
 
 
श्लोक  1.2.232 
प्रत्याख्यानं च कृष्णस्य राज्ञा दुर्योधनेन वै।
शमार्थे याचमानस्य पक्षयोरुभयोर्हितम्॥ २३२॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि भगवान कृष्ण दोनों पक्षों का कल्याण चाहते थे और शांति की प्रार्थना कर रहे थे, फिर भी राजा दुर्योधन ने उनका विरोध किया।
 
Although Lord Krishna wanted the welfare of both the parties and was praying for peace, King Duryodhana opposed Him. 232.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)