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mahabharat 1.2.21: तीन समूहों से मिलकर एक 'गण' बनता है, तीन गणों से मिलकर एक 'वाहिनी' बनती है और तीनों वाहिनियों को सेना के रहस्यों को जानने वाले विद्वानों ने 'पार्थना' कहा है।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.2.21 
त्रयो गुल्मा गणो नाम वाहिनी तु गणास्त्रय:।
स्मृतास्तिस्रस्तु वाहिन्य: पृतनेति विचक्षणै:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तीन समूहों से मिलकर एक 'गण' बनता है, तीन गणों से मिलकर एक 'वाहिनी' बनती है और तीनों वाहिनियों को सेना के रहस्यों को जानने वाले विद्वानों ने 'पार्थना' कहा है।
 
Three groups make one 'Gana', three Ganas make one 'Vahini' and the three Vahinis have been called 'Partana' by the scholars who know the secrets of the army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)