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mahabharat 1.2.20: विद्वान पुरुष इस पत्ते की तीन संख्या को 'सेनामुख' कहते हैं। तीन 'सेनामुख' को एक 'गुल्म' कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.2.20 
पत्तिं तु त्रिगुणामेतामाहु: सेनामुखं बुधा:।
त्रीणि सेनामुखान्येको गुल्म इत्यभिधीयते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष इस पत्ते की तीन संख्या को 'सेनामुख' कहते हैं। तीन 'सेनामुख' को एक 'गुल्म' कहते हैं।
 
Learned men call the triple number of this leaf as 'Senaamukh'. Three 'Senaamukhs' are called one 'Gulm'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)