Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.2.197: इसके बाद पाण्डव काम्यक नामक महान् वन में विचरण करने लगे। इस प्रसंग में वृहद्रौणिक उपाख्यान भी बड़े विस्तार से कहा गया है ॥197॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 197
 
 
श्लोक  1.2.197 
काम्यके काननश्रेष्ठे पुनर्गमनमुच्यते।
व्रीहिद्रौणिकमाख्यानमत्रैव बहुविस्तरम्॥ १९७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद पाण्डव काम्यक नामक महान् वन में विचरण करने लगे। इस प्रसंग में वृहद्रौणिक उपाख्यान भी बड़े विस्तार से कहा गया है ॥197॥
 
After this, the Pandavas wandered into the great forest called Kamyaka. In this context, the Vrihidraunic anecdote has also been told in great detail. 197॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)