Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.2.143: जब महान पाण्डव वनवास के लिए जा रहे थे, तब नगर के बहुत से नागरिक बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर के पीछे-पीछे चलने लगे ॥143॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  1.2.143 
वनवासं प्रयातेषु पाण्डवेषु महात्मसु।
पौरानुगमनं चैव धर्मपुत्रस्य धीमत:॥ १४३॥
 
 
अनुवाद
जब महान पाण्डव वनवास के लिए जा रहे थे, तब नगर के बहुत से नागरिक बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर के पीछे-पीछे चलने लगे ॥143॥
 
When the great Pandavas were travelling for their exile, many citizens of the city began to follow the wise Dharmaraja Yudhishthira.॥ 143॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)