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mahabharat 1.2.136: यज्ञ में पाण्डवों का वैभव देखकर दुर्योधन शोक और ईर्ष्या से भर गया। इस प्रसंग में भीमसेन ने सभाभवन के सामने मैदान में उसका उपहास किया। 136.   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.136 
यज्ञे विभूतिं तां दृष्ट्वा दु:खामर्षान्वितस्य च।
दुर्योधनस्यावहासो भीमेन च सभातले॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ में पाण्डवों का वैभव देखकर दुर्योधन शोक और ईर्ष्या से भर गया। इस प्रसंग में भीमसेन ने सभाभवन के सामने मैदान में उसका उपहास किया। 136.
 
Seeing the splendour of the Pandavas at the sacrifice, Duryodhan was filled with grief and jealousy. In this context, Bhimasena ridiculed him on the plain ground in front of the assembly hall. 136.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)