Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.132-134: दूसरा सभापर्व है। इसमें अनेक कथाओं का वर्णन है। पाण्डवों की सभा का निर्माण, किंकर नामक राक्षसों का आविर्भाव, देवर्षि नारद द्वारा लोकपालों की सभा का वर्णन, राजसूय यज्ञ का प्रारम्भ और जरासंध का वध, श्रीकृष्ण द्वारा गिरिव्रज में बंदी राजाओं को मुक्त कराना तथा पाण्डवों पर विजय आदि का वर्णन भी इसी सभापर्व में है। | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूसरा सभापर्व है। इसमें अनेक कथाओं का वर्णन है। पाण्डवों की सभा का निर्माण, किंकर नामक राक्षसों का आविर्भाव, देवर्षि नारद द्वारा लोकपालों की सभा का वर्णन, राजसूय यज्ञ का प्रारम्भ और जरासंध का वध, श्रीकृष्ण द्वारा गिरिव्रज में बंदी राजाओं को मुक्त कराना तथा पाण्डवों पर विजय आदि का वर्णन भी इसी सभापर्व में है।
The second is Sabha Parva. Many stories are described in it. The formation of the Pandavas' assembly, the appearance of the demons named Kinkar, the description of the assembly of Lokpalas by Devarshi Narad, the beginning of the Rajsuya Yagya and the killing of Jarasandha, the release of the captive kings in Girivraj by Shri Krishna and the victory over the Pandavas are also described in this sabhaparva. 132—134॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥