Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.10: तत्पश्चात पितरों ने वरदान देते हुए कहा, 'ऐसा ही होगा।' साथ ही, उन्होंने यह कहकर उन्हें क्षत्रियों का संहार करने से रोक दिया, 'अब शेष क्षत्रिय कुल को क्षमा कर दो।' इसके बाद परशुराम शांत हुए॥10॥ | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं भविष्यतीत्येवं पितरस्तमथाब्रुवन्।
तं क्षमस्वेति निषिषिधुस्तत: स विरराम ह॥ १०॥
अनुवाद
तत्पश्चात पितरों ने वरदान देते हुए कहा, 'ऐसा ही होगा।' साथ ही, उन्होंने यह कहकर उन्हें क्षत्रियों का संहार करने से रोक दिया, 'अब शेष क्षत्रिय कुल को क्षमा कर दो।' इसके बाद परशुराम शांत हुए॥10॥
Thereafter the ancestors gave the boon saying, 'It will happen like this'. Also, they stopped him from killing the Kshatriyas by saying, 'Now forgive the remaining Kshatriya clan'. After this, Parshuram became calm.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥