Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.198.4: सुन्दर रूप और उत्तम आचार से युक्त, विनय और उत्तम आचरण से सुशोभित अपनी पुत्रवधू द्रौपदी को देखकर कुन्तीदेवी ने प्रेमपूर्वक उसे आशीर्वाद दिया और कहा -॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.198: कुन्तीका द्रौपदीको उपदेश और आशीर्वाद तथा भगवान् श्रीकृष्णका पाण्डवोंके लिये उपहार भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 198: कुन्तीका द्रौपदीको उपदेश और आशीर्वाद तथा भगवान् श्रीकृष्णका पाण्डवोंके लिये उपहार भेजना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.198.4 
रूपलक्षणसम्पन्नां शीलाचारसमन्विताम्।
द्रौपदीमवदत् प्रेम्णा पृथाऽऽशीर्वचनं स्नुषाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर रूप और उत्तम आचार से युक्त, विनय और उत्तम आचरण से सुशोभित अपनी पुत्रवधू द्रौपदी को देखकर कुन्तीदेवी ने प्रेमपूर्वक उसे आशीर्वाद दिया और कहा -॥4॥
 
Seeing her daughter-in-law Draupadi, endowed with beautiful form and excellent manners, adorned with modesty and good conduct, Kunti Devi blessed her lovingly and said -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)