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mahabharat 1.196.46: उनके ऐसा कहने पर ऋषि कन्या ने वरदाता महेश्वर से बार-बार कहा- 'मैं सर्वगुण संपन्न पति चाहती हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.196.46 
सैवमुक्ताब्रवीत् कन्या देवं वरदमीश्वरम्।
पतिं सर्वगुणोपेतमिच्छामीति पुन: पुन:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर ऋषि कन्या ने वरदाता महेश्वर से बार-बार कहा- 'मैं सर्वगुण संपन्न पति चाहती हूँ।'
 
On his saying this, the sage's daughter repeatedly told the boon-giver Maheshwar - 'I want a husband endowed with all the virtues.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)