Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.196.16: इंद्र को क्रोध में भरा हुआ देखकर दिव्य पुरुष हंस पड़ा। उसने धीरे से अपनी आँखें उठाकर उसकी ओर देखा। जैसे ही उसकी दृष्टि इंद्र पर पड़ी, देवराज का शरीर सुन्न (कठोर) हो गया। वह काठ के ठूँठ के समान निश्चल हो गया॥16॥ | mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रुद्धं च शक्रं प्रसमीक्ष्य देवो
जहास शक्रं च शनैरुदैक्षत।
संस्तम्भितोऽभूदथ देवराज-
स्तेनेक्षित: स्थाणुरिवावतस्थे॥ १६॥
अनुवाद
इंद्र को क्रोध में भरा हुआ देखकर दिव्य पुरुष हंस पड़ा। उसने धीरे से अपनी आँखें उठाकर उसकी ओर देखा। जैसे ही उसकी दृष्टि इंद्र पर पड़ी, देवराज का शरीर सुन्न (कठोर) हो गया। वह काठ के ठूँठ के समान निश्चल हो गया॥16॥
Seeing Indra filled with anger, the divine man laughed. He slowly raised his eyes and looked at him. As soon as his gaze fell on Indra, the body of Devraj became numb (stiff). He became motionless like a stump of wood.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥