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mahabharat 1.196.12: यह अद्भुत दृश्य देखकर वज्रधारी इन्द्र ने कन्या के पास जाकर पूछा, 'हे प्रिये! तुम कौन हो और क्यों रो रही हो? मुझे बताओ, मैं तुमसे सत्य जानना चाहता हूँ।'॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.196.12 
तदद्‍भुतं प्रेक्ष्य वज्री तदानी-
मपृच्छत् तां योषितमन्तिकाद् वै।
का त्वं भद्रे रोदिषि कस्य हेतो-
र्वाक्यं तथ्यं कामयेऽहं ब्रवीहि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह अद्भुत दृश्य देखकर वज्रधारी इन्द्र ने कन्या के पास जाकर पूछा, 'हे प्रिये! तुम कौन हो और क्यों रो रही हो? मुझे बताओ, मैं तुमसे सत्य जानना चाहता हूँ।'॥12॥
 
Seeing this wonderful sight, the thunderbolt-wielding Indra went near the maiden and asked, 'O dear! Who are you and why are you crying? Tell me, I want to know the truth from you.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)