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mahabharat 1.196.10: उसे देखकर सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए। उनमें सबसे प्रमुख और पराक्रमी इन्द्र उस कमल को खोजने के लिए गंगाजी के उद्गम की ओर चल पड़े। गंगोत्री के निकट पहुँचकर, जहाँ गंगादेवी का जल सदैव अविरल गिरता रहता है, इन्द्र ने अग्नि के समान तेजस्वी एक युवती को देखा।   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.196.10 
दृष्ट्वा च तद् विस्मितास्ते बभूवु-
स्तेषामिन्द्रस्तत्र शूरो जगाम।
सोऽपश्यद् योषामथ पावकप्रभां
यत्र देवी गङ्गा सततं प्रसूता॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उसे देखकर सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए। उनमें सबसे प्रमुख और पराक्रमी इन्द्र उस कमल को खोजने के लिए गंगाजी के उद्गम की ओर चल पड़े। गंगोत्री के निकट पहुँचकर, जहाँ गंगादेवी का जल सदैव अविरल गिरता रहता है, इन्द्र ने अग्नि के समान तेजस्वी एक युवती को देखा।
 
Seeing her, all the gods were astonished. Indra, the most prominent and valiant among them, went towards the origin of Gangaji to find that lotus. Reaching near Gangaotri, where the water of Gangadevi always keeps falling incessantly, Indra saw a radiant young woman as bright as fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)