श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.195.8 
न चाप्याचरित: पूर्वैरयं धर्मो महात्मभि:।
न चाप्यधर्मो विद्वद्भिश्चरितव्य: कथंचन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल के महापुरुषों ने भी ऐसा धर्म नहीं किया और विद्वानों को भी किसी प्रकार का अधर्म नहीं करना चाहिए। ॥8॥
 
Even the great men of the past did not practice such Dharma (righteousness), and learned men should not practice any kind of Adharma (unrighteousness). ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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