न चाप्याचरित: पूर्वैरयं धर्मो महात्मभि:।
न चाप्यधर्मो विद्वद्भिश्चरितव्य: कथंचन॥ ८॥
अनुवाद
पूर्वकाल के महापुरुषों ने भी ऐसा धर्म नहीं किया और विद्वानों को भी किसी प्रकार का अधर्म नहीं करना चाहिए। ॥8॥
Even the great men of the past did not practice such Dharma (righteousness), and learned men should not practice any kind of Adharma (unrighteousness). ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥