श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.195.3 
अनुज्ञातास्तु ते सर्वे कृष्णेनामिततेजसा।
आसनेषु महार्हेषु निषेदुर्द्विपदां वरा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
फिर अमित-तेजस्वी व्यासजी की अनुमति पाकर सभी श्रेष्ठ पुरुष बहुमूल्य आसनों पर बैठ गए॥3॥
 
Then after receiving the permission of Amit-Tejasvi Vyasji, all the best men sat on precious seats. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)