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mahabharat 1.195.20: जिस प्रकार और कारण से इसे सनातन धर्म के अनुकूल कहा गया है और जिस प्रकार कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने इसे धर्म के अनुरूप प्रतिपादित किया है, यह सब विचार करने से निःसंदेह यह सिद्ध होता है कि यह विवाह धर्म के अनुकूल है॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.195.20 
यथायं विहितो धर्मो यतश्चायं सनातन:।
यथा च प्राह कौन्तेयस्तथा धर्मो न संशय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार और कारण से इसे सनातन धर्म के अनुकूल कहा गया है और जिस प्रकार कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने इसे धर्म के अनुरूप प्रतिपादित किया है, यह सब विचार करने से निःसंदेह यह सिद्ध होता है कि यह विवाह धर्म के अनुकूल है॥ 20॥
 
The manner and reason for which it has been said to be in accordance with Sanatan Dharma and the manner in which Kunti's son Yudhishthira has propounded its conformity to Dharma, considering all this, it is undoubtedly proved that this marriage is in accordance with Dharma.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)