Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.195.18: कुंती बोली, "धर्म के मार्ग पर चलने वाले युधिष्ठिर ने जो कहा है, वह ठीक ही है। (मैंने द्रौपदी के साथ पाँचों भाइयों के विवाह की अनुमति दे दी है।) मुझे झूठ बोलने से बहुत डर लगता है; बताइए, मैं झूठ बोलने के पाप से कैसे बच सकती हूँ?" | mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुंती बोली, "धर्म के मार्ग पर चलने वाले युधिष्ठिर ने जो कहा है, वह ठीक ही है। (मैंने द्रौपदी के साथ पाँचों भाइयों के विवाह की अनुमति दे दी है।) मुझे झूठ बोलने से बहुत डर लगता है; बताइए, मैं झूठ बोलने के पाप से कैसे बच सकती हूँ?"
Kunti said, "What Yudhishthira, who follows the path of Dharma, has said is correct. (Of course I have given permission for the marriage of all the five brothers with Draupadi.) I am very afraid of lying; tell me, how can I avoid the sin of lying?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥