Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.195.15: इसी प्रकार, ऋषि कंडु की पुत्री वार्क्षी ने अपनी तपस्या के बल पर दस प्रचेतस के साथ विवाह संबंध स्थापित किया, जो शुद्ध हृदय के थे, समान नाम वाले थे तथा आपस में भाई थे। | mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथैव मुनिजा वार्क्षी तपोभिर्भावितात्मन:।
संगताभूद् दश भ्रातॄनेकनाम्न: प्रचेतस:॥ १५॥
अनुवाद
इसी प्रकार, ऋषि कंडु की पुत्री वार्क्षी ने अपनी तपस्या के बल पर दस प्रचेतस के साथ विवाह संबंध स्थापित किया, जो शुद्ध हृदय के थे, समान नाम वाले थे तथा आपस में भाई थे।
Similarly, Varkshi, daughter of the sage Kandu, through her penance entered into marital relations with ten Prachetas who were pure in heart and had the same name and were brothers among themselves.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥