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mahabharat 1.195.13-14: युधिष्ठिर ने कहा, "मेरी वाणी कभी झूठ नहीं बोलती और मेरी बुद्धि कभी गलत कामों में प्रवृत्त नहीं होती। परंतु मेरा मन इस विवाह की ओर प्रवृत्त है, इसलिए यह किसी भी प्रकार अनुचित नहीं है।" पुराणों में यह भी सुनने को मिलता है कि गौतम गोत्र की जटिला नामक कन्या, जो पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ थी, ने सप्त ऋषियों से विवाह किया था।   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  1.195.13-14 
युधिष्ठिर उवाच
न मे वागनृतं प्राह नाधर्मे धीयते मति:।
वर्तते हि मनो मेऽत्र नैषोऽधर्म: कथंचन॥ १३॥
श्रूयते हि पुराणेऽपि जटिला नाम गौतमी।
ऋषीनध्यासितवती सप्त धर्मभृतां वरा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "मेरी वाणी कभी झूठ नहीं बोलती और मेरी बुद्धि कभी गलत कामों में प्रवृत्त नहीं होती। परंतु मेरा मन इस विवाह की ओर प्रवृत्त है, इसलिए यह किसी भी प्रकार अनुचित नहीं है।" पुराणों में यह भी सुनने को मिलता है कि गौतम गोत्र की जटिला नामक कन्या, जो पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ थी, ने सप्त ऋषियों से विवाह किया था।
 
Yudhishthira said, "My tongue never lies and my intellect never indulges in wrongdoings. But my mind is inclined towards this marriage, so it is not wrong in any way. It is also heard in the Puranas that a girl named Jatila, belonging to Gautam Gotra, who was the best among the virtuous, married seven sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)