श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.195.10 
धृष्टद्युम्न उवाच
यवीयस: कथं भार्यां ज्येष्ठो भ्राता द्विजर्षभ।
ब्रह्मन् समभिवर्तेत सवृत्त: संस्तपोधन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न बोले, 'हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! आप ब्राह्मण हैं, ऋषि हैं; मुझे बताइए कि बड़ा भाई, सदाचारी होते हुए भी अपने छोटे भाई की पत्नी के साथ कैसे सहवास कर सकता है?'
 
Dhrishtadyumna said, 'O best of Brahmins! You are a Brahmin, a sage; tell me, how can an elder brother, despite being virtuous, have intercourse with his younger brother's wife?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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