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mahabharat 1.194.30: मेरी वाणी कभी झूठ नहीं बोलती और मेरी बुद्धि कभी गलत कामों में प्रवृत्त नहीं होती। हमारी माता ने हमें ऐसा ही करने का आदेश दिया है और मुझे भी यही उचित प्रतीत होता है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.194: द्रुपद और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा व्यासजीका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 194: द्रुपद और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा व्यासजीका आगमन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.194.30 
न मे वागनृतं प्राह नाधर्मे धीयते मति:।
एवं चैव वदत्यम्बा मम चैतन्मनोगतम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मेरी वाणी कभी झूठ नहीं बोलती और मेरी बुद्धि कभी गलत कामों में प्रवृत्त नहीं होती। हमारी माता ने हमें ऐसा ही करने का आदेश दिया है और मुझे भी यही उचित प्रतीत होता है ॥30॥
 
My tongue never lies and my intellect never indulges in wrongdoings. Our mother has instructed us to do the same and it seems right to me too. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)