श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 194: द्रुपद और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा व्यासजीका आगमन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.194.29 
युधिष्ठिर उवाच
सूक्ष्मो धर्मो महाराज नास्य विद्मो वयं गतिम्।
पूर्वेषामानुपूर्व्येण यातं वर्त्मानुयामहे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "महाराज, धर्म का स्वरूप अत्यंत सूक्ष्म है। हम उसकी गति को नहीं जानते। हम धीरे-धीरे उसी मार्ग का अनुसरण करते हैं जिस पर प्राचीन काल में प्रचेतस आदि महात्मा चलते थे।"
 
Yudhishthira said, "Maharaj, the nature of Dharma is very subtle. We do not know its movement. We gradually follow the path followed by Prachetas and others in the past."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)