Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.193.10-11: महाराज! पाण्डवों की चाल सिंह के समान वीरतापूर्ण थी, उनकी आँखें बैल के समान बड़ी-बड़ी थीं, उन्होंने काले मृगचर्म के दुपट्टे ओढ़ रखे थे, उनकी कंठमालाएँ मांस से छिपी हुई थीं और उनकी भुजाएँ सर्पराज के शरीर के समान मोटी और विशाल थीं। उन सिंहरूपी पाण्डवों को देखकर राजा द्रुपद, उनके सभी पुत्र, मंत्री, इष्ट-मित्र और सभी सेवक अत्यन्त प्रसन्न हुए। | mahabharat अध्याय 1.193: पाण्डवों और कुन्तीका द्रुपदके घरमें जाकर सम्मानित होना और राजा द्रुपदद्वारा पाण्डवोंके शील-स्वभावकी परीक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! पाण्डवों की चाल सिंह के समान वीरतापूर्ण थी, उनकी आँखें बैल के समान बड़ी-बड़ी थीं, उन्होंने काले मृगचर्म के दुपट्टे ओढ़ रखे थे, उनकी कंठमालाएँ मांस से छिपी हुई थीं और उनकी भुजाएँ सर्पराज के शरीर के समान मोटी और विशाल थीं। उन सिंहरूपी पाण्डवों को देखकर राजा द्रुपद, उनके सभी पुत्र, मंत्री, इष्ट-मित्र और सभी सेवक अत्यन्त प्रसन्न हुए।
King! The gait of the Pandavas was as valorous as that of a lion, their eyes were as big as a bull's, they had covered themselves with black deerskin dupattas, their collar bones were hidden by flesh and their arms were as thick and large as the body of a king of snakes. Seeing those lion-like Pandavas, King Drupada, all his sons, ministers, close friends and all the servants were very happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥