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mahabharat 1.192.24-25: 'राजा ने वहाँ जाति, वर्ण, कुल और वंश के विषय में कोई मत प्रकट नहीं किया था। धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर लक्ष्य पर प्रहार करने के पश्चात ही उन्होंने कन्या को सौंपने की घोषणा की थी। इस वीर और महापुरुष ने उसी घोषणा के अनुसार राजाओं की सभा में राजकुमारी कृष्णा को जीत लिया है। ऐसी स्थिति में सोमकवंशी राजा द्रुपद को सुख से वंचित करने वाला शोक नहीं करना चाहिए।॥ 24-25॥   |   mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  1.192.24-25 
न तत्र वर्णेषु कृता विवक्षा
न चापि शीले न कुले न गोत्रे।
कृतेन सज्येन हि कार्मुकेण
विद्धेन लक्ष्येण हि सा विसृष्टा॥ २४॥
सेयं तथानेन महात्मनेह
कृष्णा जिता पार्थिवसङ्घमध्ये।
नैवंगते सौमकिरद्य राजा
संतापमर्हत्यसुखाय कर्तुम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'राजा ने वहाँ जाति, वर्ण, कुल और वंश के विषय में कोई मत प्रकट नहीं किया था। धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर लक्ष्य पर प्रहार करने के पश्चात ही उन्होंने कन्या को सौंपने की घोषणा की थी। इस वीर और महापुरुष ने उसी घोषणा के अनुसार राजाओं की सभा में राजकुमारी कृष्णा को जीत लिया है। ऐसी स्थिति में सोमकवंशी राजा द्रुपद को सुख से वंचित करने वाला शोक नहीं करना चाहिए।॥ 24-25॥
 
‘The king had not expressed any opinion there on the subject of caste, character, family and lineage. He had announced the handing over of the daughter only after he had strung the bow and hit the target. This brave and great soul has won over Princess Krishna in the assembly of kings as per that announcement. In such a situation, King Drupada of the Somka dynasty should not feel the sorrow that deprives him of happiness.॥ 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)