Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.189.46-47: जब पुत्र-प्रेम में इस प्रकार भीगी हुई कुन्ती देवी विचारों में मग्न थीं, जब आकाश में घने बादल छाने के कारण दिन खराब था और लोग अपना सारा काम-काज छोड़कर अपने-अपने घरों में निश्चल बैठे थे, मानो सो रहे हों, उसी समय, दिन के तीसरे पहर में, बादलों से घिरे हुए सूर्य के समान, ब्राह्मणों के समूह से घिरे हुए अर्जुन कुम्हार के घर में प्रविष्ट हुए। | mahabharat अध्याय 1.189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब पुत्र-प्रेम में इस प्रकार भीगी हुई कुन्ती देवी विचारों में मग्न थीं, जब आकाश में घने बादल छाने के कारण दिन खराब था और लोग अपना सारा काम-काज छोड़कर अपने-अपने घरों में निश्चल बैठे थे, मानो सो रहे हों, उसी समय, दिन के तीसरे पहर में, बादलों से घिरे हुए सूर्य के समान, ब्राह्मणों के समूह से घिरे हुए अर्जुन कुम्हार के घर में प्रविष्ट हुए।
When Kunti Devi, thus drenched in the love of her son, was lost in thoughts, when it was a bad day because of the heavy clouds gathering in the sky and the people, having left all their work, were sitting motionless in their houses as if asleep, at that very time, in the third quarter of the day, Arjuna, surrounded by a group of Brahmins, like the sun surrounded by clouds, entered the potter's house.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि स्वयंवरपर्वणि पाण्डवप्रत्यागमने एकोननवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत स्वयंवरपर्वमें पाण्डवप्रत्यागमनविषयक एक सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥