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mahabharat 1.189.38: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीमसेन का अद्भुत कार्य देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने यह समझकर कि ये दोनों भाई कुन्तीपुत्र भीमसेन और अर्जुन हैं, उन सब राजाओं को समझाया कि 'इन दोनों ने धर्मपूर्वक द्रौपदी को प्राप्त किया है' और उन्हें युद्ध करने से रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.189.38 
वैशम्पायन उवाच
तत् कर्म भीमस्य समीक्ष्य कृष्ण:
कुन्तीसुतौ तौ परिशङ्कमान:।
निवारयामास महीपतींस्तान्
धर्मेण लब्धेत्यनुनीय सर्वान्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीमसेन का अद्भुत कार्य देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने यह समझकर कि ये दोनों भाई कुन्तीपुत्र भीमसेन और अर्जुन हैं, उन सब राजाओं को समझाया कि 'इन दोनों ने धर्मपूर्वक द्रौपदी को प्राप्त किया है' और उन्हें युद्ध करने से रोक दिया।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Seeing the wonderful deed of Bhimasena, Lord Krishna, thinking that these two brothers are Kunti's son Bhimasena and Arjuna, persuaded all those kings by telling them that 'these two have obtained Draupadi in a righteous manner' and stopped them from fighting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)