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mahabharat 1.189.22-23h: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! अर्जुन के ये वचन सुनकर महाबली कर्ण ने ब्रह्मबल को अजेय समझकर उस समय युद्ध छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.189.22-23h 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु राधेयो युद्धात् कर्णो न्यवर्तत॥ २२॥
ब्राह्मं तेजस्तदाजय्यं मन्यमानो महारथ:।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! अर्जुन के ये वचन सुनकर महाबली कर्ण ने ब्रह्मबल को अजेय समझकर उस समय युद्ध छोड़ दिया।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words from Arjuna, the mighty warrior Karna, considering Brahman's power to be invincible, abandoned the battle at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)